Jadui Pari

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Jadui Pari ki Kahaniyan or Jadui Pari ki Kahani– दोस्तों आप लोगों ने जादुई कहानी तो बहुत सुनी होगी, मैं आज आप लोगों को जादुई परी (Pariyo ki Kahani) की कहानी सुनाने जा रहा हूं, आशा करता हूं | कि आप लोगों को जादुई परी की कहानी बहुत पसंद आएगी, क्योंकि आज भी छोटे-छोटे बच्चे जादुई की कहानी को पढ़ना बहुत पसंद करते हैं|     

(Pari ki Kahaniya Jadui Pari )

जुड़वा परियां. (Jadui Kahani or Jadui Kahaniya)

एक बार परीलोक में एक करिश्मा हुआ, और नीलिमा परी के घर एक बच्चे का जन्म हुआ जो जुड़वा थे| और दोनों ही लाल और नीली अंकों के साथ पैदा हुई थी| और दोनों ही लड़कियां थी आज तक परीलोक में ऐसा नहीं हुआ था दोनों ही बच्चे बहुत स्वास्थ्य और खूबसूरत थे लेकिन उनका शरीर दाहिने तरफ से जुड़ा हुआ था|

दोनों बच्चे बड़े हो गए थे वह साथ खेलती खाती घूमती और एक दूसरे की सहेलियां बन गई थी फिर उनकी शादी के लिए एक ऐसा लड़का तलाशा जाने लगा जो दोनों से ही शादी कर ले, आखिर पृथ्वी पर रहने वाला मगध देश का राजा, इसके लिए मान गया और उसने उनसे शादी कर लिया|

Pariyo ki Kahani – Jadui Pariyo ki Kahani

एक बार लाल परी की राजा से लड़ाई हो गई, क्योंकि उसे धरती लोग अच्छा नहीं लग रहा था| वह वापस परीलोक जाना चाहती थी, और सुना भाई लोग जाने का निर्णय ले लिया, नीली परी धर्म संकट में पड़ गई| क्योंकि वह अपने पति को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी| उसने लाल परी को बहुत समझाया पर वह नहीं मानी,

Jadui Pari
Jadui Pari

फिर राजा ने सोचा मंत्री से मदद लिया फिर मंत्री ने कहा प्यारे राजन यह मैं नहीं कर सकता पर डालू पर्वत पर रहने वाली गोरीका जादूगरनी आपका मदद कर सकती है| राजा ने सैनिक भेजे गोरीका जादूगरनी को बुलाने के लिए| गोरीका ने कहा राजा मैं बस इतना ही कर सकती हूं,

की इनमें से एक को दूसरे के शरीर मैं मिला सकती हूं, और एक बना सकती हूं, बोलिए आप किस परी के साथ रहना चाहते हैं, राजा ने तुरंत नीली परी का नाम लिया फिर जादूगरनी ने अपने जादू से लाल परी को नीली परी के शरीर में लुप्त कर दिया| अवधी थी पर नीली परी के अंदर जीवित थी| राजा ने सोचा मुश्किल का हल हो गया, परम और परेशानी हो,

गई लाल क्रोध के कारण नीली को राजा से बात नहीं करने देती थी, और नीली के साथ बहुत लड़ाई करती, आखिर थक हार कर राजा ने उन्हें परीलोक वापस भेज दिया, पर लाल की नीली से दिमागी लड़ाई खत्म नहीं हुई, नीली खाना खाती तो लाल उसके पेट में ना जाने देती|

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यह सब देखकर रानी मां ने लाल को नीली से बाहर निकाला ,और कहा मैं तुम दोनों को अलग कर देती हूं, पर इससे एक ही जिंदा रहेगा बोलो किसे जीना है| लाल ने कहा नीली तो पहले ही मुझे मार चुकी थी, अब मेरी बारी है, रानी मां ने तलवार उठाया और दोनों को अलग कर दिया|

लाल तुरंत उड़कर अपने घर चली गई, और नीली उसकी सलामती का दुआ मांगने लगी, रानी परी का त्याग देख बहुत खुश हुई, और उन्होंने नीली को भी जीवनदान दे दिया, और वह वापस राजा के पास चली गई, इस प्रकार यह जुड़वा परियां आराम से जीवन बिताने लगी|

चार परियां.( Pari ki Kahani or Natkhat Pari )

एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण था, काम की तलाश में जंगल में गया लकड़ी काटने गया| और लकड़ी काटते काटते हुए बहुत थक गया, और एक तालाब के किनारे बैठ कर भोजन करने लगा, उसके पास चार रोटियां थी| और उस तालाब में भी चार परियां रहती थी, वह ब्राह्मण अपनी चारों रोटियां गिनने लगा और कहने लगा एक को खाऊं कि चारों को खाऊं|

उसी समय तालाब से एक परिवार आई, और कहने लगी हमें मत खाना तुम्हें क्या चाहिए, तब ब्राह्मण बोला मुझे खाना बनाने वाला बर्तन दे दो, परी उसको एक बर्तन देती है| और कहती है, जो इच्छा हो इस बर्तन में बना लेना, तब ब्राह्मण ने बोला है, परी इस बर्तन में खीर बन जाए तो बर्तन में खीर बन जाती है|

तो ब्राह्मण बहुत खुश हुआ, और बर्तन को लेकर अपने घर आ गया| और घर के सभी सदस्य और पड़ोसियों को बुलाया, और बर्तन को आदेश दिया, कि इसमें गुलाब जामुन बन जाए| ऐसे ही बर्तन को जो बोलता वही भोजन बर्तन बना देता सभी बहुत खुश हुए, और सभी ने मिलजुल कर भोजन किया|

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फिर एक दिन रात को पड़ोसी ने बर्तन को चुरा लिया, और उस बर्तन की जगह साधारण बर्तन रख दिया, और सुबह उठकर बर्तन को आदेश देता है| कि है बर्तन पूरिया और हलवा बनाओ, तो उस बर्तन में कुछ भी नहीं बनता यह देखकर ब्राह्मण बहुत उदास हो गया, और बर्तन लेकर उसी तालाब के पास जाता है|

जहां परिया रहती है, और बोलता है एक को खाऊं कि चारों को खाऊं, यह सुनकर दूसरी परी बाहर आती है|और कहती है हमें मत खाना यह लो तुम बकरी ले जाओ, यह सोने की मोहरे देती है| फिर वह उस बकरी को लेकर घर गया, और सभी को इकट्ठा कर लिया पड़ोसी यह देखकर हैरान हो गए|

यह सोने की मोहरे देने वाली बकरी इसे कहां से मिल गई, फिर रात को पड़ोसी बकरी को चुरा लेते हैं, और उसकी जगह दूसरी बकरी बांध देते हैं| जब ब्राह्मण सुबह उठता है, और बकरी को सोने की मोहरे देने को कहता है| तो वह नहीं देती फिर ब्राह्मण उसी तालाब के किनारे चला जाता है और कहता है|

Pari
Pari Ki Kahani

एक को खाऊं की चारों को खाऊं यह सुनकर तीसरी परी बाहर आती है, हमें मत खाना तुम यह भेड़ ले जाओ यह सोने की सिक्के देती है, ब्राउज़र उस भेड़ को घर लेकर चला जाता है, और घर के सभी सदस्य और पड़ोसियों को बुलाता है|रात को फिर भेड़ चोरी हो जाता है, और उसकी जगह दूसरी बकरी बांध देते हैंजब ब्राह्मण सुबह उठता है कॉल, और भेड़ को सोने के सिक्के देने को कहता है|

तो वह नहीं देती ब्राह्मण फिर तालाब के किनारे चला जाता है, एक को खाऊं की चारों को खाऊं यह सुनकर चौथी परी तालाब से बाहर आती है, हमें मत खाना यह रस्सी और डंडा ले जाओ तब ब्राह्मण लस्सी और डंडा ले जाता है| और फिर सभी को इकट्ठा करता है और कहता है, आज मैं एक नई चीज ले आया हूं,

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और अपने परिवार को छोड़कर पड़ोसियों को रस्सी से बांध देता है| और डंडे को कहता है इनकी खूब पिटाई करो फिर पड़ोसी कहते हैं| हमसे गलती हो गई हमें मत मारो हमने ही तुम्हारे सभी चीजें चुराई है, हमें माफ करो हम सब कुछ वापस कर देंगे फिर उसे सारा सामान वापस मिल जाता है, और मैं खुशी-खुशी अपने घर चला जाता है|

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, कि किसी पराए के धन पर नजर नहीं रखना चाहिए हमेशा अपनी ही कमाई पर खुश रहना चाहिए|

सुंदर काली परी. (Jadui kahani or Jadui Pari)

परी लोक की सुंदर दुनिया मैं बहुत सी परियां रहती थी| उनके बीच एक चंद्रमुखी नाम की परी रहती थी, वह बहुत सुंदर थी लेकिन उसका रंग काला था ,कुछ परियां उसके काले रंग के कारण उससे बात नहीं करती थी |चंद्रमुखी परी की एक सहेली थी उसका नाम पूनम परी था, वह चंद्रमुखी परी के पास आई और कहा चलो पृथ्वी लोग चलते हैं|

चंद्रमुखी ने उदास मन से कहा पूनम मेरा मन नहीं कर रहा है, फिर कभी चलेंगे चलो ना वहां तुम्हारा मन बहल जाएगा पूनम परी के जिद के आगे चंद्रमुखी परी को हामी भरनी पड़ी फिर दोनों परियां रानी परी से आदेश लेकर पृथ्वीलोक की तरफ उड़ चली, उड़ते उड़ते पहाड़ के पास बहती गंगा नदी के किनारे उतर गई, और बहती गंगा कि पानी को जैसे चंद्रमुखी ने छुआ तो उसके शरीर में एक हलचल हुई, तो वाह पीछे हट गई तो पूनम परी ने पूछा क्या हुआ चंद्रमुखी|

क्या हुआ चंद्रमुखी तुम पीछे क्यों हट गई, तो चंद्रमुखी ने कहा इस नदी के पानी को छूते ही अजीब सी ताजगी महसूस हुई, ऐसा क्यों हुआ मैं नहीं जानती, दोनों पारियों में आपस में बातचीत चल रही थी, कि अचानक वहां एक राजकुमार आया, और नदी के पास पहुंच गया और नदी से एक चुल्लू पानी उठाकर अपने मुंह में डाला तभी उसकी नजर चंद्रमुखी पर पड़ी, और वह देखता ही रह गया|

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इसके बाद वह दोनों परियों के पास पहुंच गया और फिर दोनों परियों से प्रश्न किया क्या आप लोग परी लोक से आए हैं, पूनम परी ने उत्तर दिया जी हां राजकुमार हम दोनों परी लोक से आई हैं, फिर चंद्रमुखी ने देखा कि राजकुमार के दाहिने कंधे से खून निकल रहा है, तो राजकुमार ने कहा एक शेर से मुठभेड़ हो गई और उसी ने यह जख्म दिया, चंद्रमुखी ने जादू की छड़ी से राजकुमार का जख्म ठीक कर दिया,

Jadui Pari Ki Kahani
Jadui Pari Ki Kahani

राजकुमार ने कहा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपका हमारे राज्य में स्वागत है आप दोनों हमारे मेहमान हैं आप लोगों को किसी भी चीज की जरूरत हो तो हमें जरूर याद कीजिएगा, अच्छा तो मैं आज्ञा चाहता हूं मैं शीघ्र ही लौटूंगा इतना कहकर राजकुमार वहां से चला गया, दोनों पर या वहां से आगे बढ़ गई चलते चलते उन्हें एक कुटिया दिखाई दी, वह दोनों वहीं रुक गई, फिर उन्होंने देखा कि कुटिया के अंदर से एक साधु महात्मा बाहर आए|

तो दोनों परियों ने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया, फिर महात्मा ने दोनों परियों को आशीर्वाद देते हुए कहा ईश्वर आप दोनों का कल्याण करें , ऐसा लगता है, आप दोनों पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने आई है| फिर महात्मा ने कहा यहां पर कुछ चोर लुटेरे भी है| जिन्होंने मेरे गाय और बछड़े को चुरा लिया है, यह सुनकर चंद्रमुखी ने अपने जादू की छड़ी को घुमा कर कहा कि महात्मा जी की गाय और बछड़े को यहां प्रस्तुत करो|

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फिर पूनम परी ने अपनी जादू की छड़ी से महात्मा जी के कुटिया के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना दिया| यह देख कर महात्मा जी बहुत खुश हुए, वह कुटिया के अंदर गए और बाहर आकर मंत्र पढ़कर अपने कमंडल से जल लेकर चंद्रमुखी पर छिड़क दिया, चंद्रमुखी का काला रंग गोरे रंग में बदल गया, यह देखकर चंद्रमुखी बहुत खुश हुई, और फिर चंद्रमुखी ने सर झुका कर महात्मा जी को प्रणाम किया और कहा मैं आपकी आभारी हूं, और फिर उनके मुड़ते ही उन्होंने राजकुमार को एक रथ के साथ खड़ा पाया और जैसे ही राजकुमार ने चंद्रमुखी परी को देखा तो देखता ही रह गया,

उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया था, और फिर राजकुमार ने चंद्रमुखी परी का हाथ पकड़ कर रथ पर चढ़ा लिया| फिर पूनम परी भी मुस्कुराते हुए रथ पर चढ़ गई, फिर राजकुमार रथ को लेकर राजमहल चला गया | यह सब इसलिए हुआ क्योंकि चंद्रमुखी ने राजकुमार और महात्मा की सहायता की जिससे उसको गोरा रंग प्राप्त हुआ, जिससे उसकी जीवन में खुशियों की बहार आ गई|

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