Khargosh aur Kachhua ki Kahani

Khargosh aur Kachhua ki kahani | Hindi Story for Kids Kahani

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Khargosh aur Kachhua ki kahani | Hindi Story for kids – हमारे देश में आज भी बच्चों को दादा दादी से नाना नानी से Hindi story or kahaniya सुनना बहुत ही पसंद है| इसलिए आज मैं आपके बच्चों के लिए और बच्चों आपके लिए भी सबसे मशहूर कहानी कछुआ और खरगोश की कहानी सुनाने वाला हूं | आशा करता हूं कि आपको यह कहानी बहुत ही ज्यादा पसंद आए |

खरगोश और कछुए की कहानी. (khargosh aur kachua ki kahani)

एक जंगल में एक खरगोश और कछुआ रहते थे, खरगोश को बड़ा घमंड था, कि वह तेज दौड़ सकता है, वाह कछुए की धीमी चाल को देखकर उसकी मजाक उड़ाता था, ऐसे में एक दिन खरगोश,क्यों कछुआ चाचा क्या तुम मेरे साथ दौड़ लगाओगे, कछुआ चाचा बोलते हैं क्यों नहीं, फिर खरगोश बोलता है, हम दोनों में जो जीतेगा,उसे बढ़िया इनाम मिलेगा,

ऐसा ही सही, अब इस दौड़ को देखने के लिए जंगल के सभी जानवर बड़ी उत्सुकता से उस जगह पहुंचते हैं, हम दोनों में से जो उस दूर वाली पहाड़ी पर पहले पहुंचेगा समझो वह जीता ठीक है, दौड़ शुरू होती है, खरगोश तेज दौड़ने लगता है, और कछुआ धीरे धीरे चलने लगता है, खरगोश और तेज दौड़ने लगता है, कछुआ वही धीरे धीरे चलने लगता है,

Khargosh aur Kachhua ki Kahani
Khargosh aur Kachhua ki Kahani

इस तरह कुछ दूर जाने के बाद खरगोश पीछे मुड़कर देखता है,तो उसे कछुआ कहीं नहीं दिखाई देता है, फिर खरगोश सोचता है, यह कछुआ अभी बहुत दूर है, क्यों ना थोड़ी देर आराम कर लिया जाए , और आराम करते करते खरगोश की आंख लग जाती है,

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कछुआ धीरे-धीरे खरगोश के पास पहुंचा और चुपचाप उस को पार कर गया, कुछ देर बाद खरगोश की आंख खुलती है, तो वह उठकर पहाड़ की ओर दौड़ने लगता है, वहां पहुंचकर उसने कछुए को देखा और कहा दोस्त तुम ही जीते, मुझे माफ करो इस कहानी से हमें यह पता चलता है कि गर्भ का समय हमेशा नीचा होता है

भेड़िया और सारस. (Hindi Story or Kahaniya)

एक जंगल में एक भेड़िया रहता था, एक दिन मांस खाते वक्त उसके गले में एक हड्डी फंस गया, हे भगवान गले में हड्डी फंस गया अब इसे कैसे निकालूं, खुद से तो नहीं निकाल पा लूंगा, किसी का मदद लेना ही पड़ेगा, ढूंढता हूं कोई मिल जाए, तो उसकी मदद ले लूंगा, भेड़िया जंगल में ढूंढने लेगा अगर कोई मिल जाए, तभी उसे एक खरगोश मिला,

भाई थोड़ा मदद चाहिए, मेरे गले में हड्डी फंस गया है, तुम उसे निकाल दो ना, मैं और तुम्हारा मदद भूल गए, तुम मुझे उस दिन खाने वाले थे, मैं तुम पर भरोसा नहीं कर सकता, यह भी तुम्हारा कोई बहाना होगा मुझे खाने का, ना भाई मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता तुम जाओ यहां से, भेड़िया वहां से चला गया, और कुछ दूर चलने के बाद उसे एक बंदर दिखाई दिया,

भेड़िया और सारस की कहानी
Bhediya aur Saras ki Kahani

बंदर भाई थोड़ा मेरी मदद कर दो ना, तुम तो मेरे यार हो आखिर हुआ क्या है, यार मेरे गले में एक हड्डी फंस गया है, और निकल नहीं रहा है, तुम अपने लंबे मुंह से उसे निकाल दो ना, आगे बढ़ो तुम्हें दिख नहीं रहा क्या मैं केला खा रहा हूं, मुझे परेशान मत करो, भेड़िया दुखी होकर आगे बढ़ गया, और सोचने लगा इस बार जो कोई भी मिल जाए ,

उसे किसी भी तरह मनाना पड़ेगा, चलते चलते नदी के किनारे पहुंच गया, नदी में एक सारस खाना खा रहा था, उसके लंबे मुंह देखकर भेड़िया बहुत खुश हुआ, भेड़िया सारस के पास गया, और बोलने लगा कितना अच्छा दिन है, इस नदी में बहुत सारी मछलियां है, तुम अकेले सारी मछलियां नहीं ढूंढ पाओगे, तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं,

Bhediya aur Saras
Bhediya aur Saras

तुम मेरी मदद करोगे हां हां जरूर, तुम भेड़िया बहुत चालाक होते हो तुम्हारा विश्वास नहीं, बिना मतलब के तुम मेरी मदद क्यों करना चाहते हो, अरे नहीं तुम बहुत अच्छे हो तुम्हारा मुंह भी कितना लंबा है, सिर्फ एक परेशानी है मेरे गले में हड्डी फंस गया है, जो लिखकर नहीं रहा है, बस इतनी सी बात रुको मैं निकाल देता हूं,

सारस अपने मुंह से भेड़िया के गले मैं डाल कर हड्डी निकाल देता है,और कहता है, अब मछली पकड़ कर दो, मछली अरे मूर्ख मेरे गले में मुंह डालकर तूने हड्डी निकाल दिया, और तू अभी भी जिंदा है, तेरा जान बख्श दिया यही बहुत है और अगर एक भी शब्द बोला तो तुझे मार दूंगा, जा भाग यहां से सारस डर के मारे वहां से भाग गया| तो बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दुष्ट लोगों की बातों में कभी नहीं आना चाहिए |

शेर और खरगोश. (Hindi story kahaniya)

एक जंगल में बहुत से जानवर आपस में मिलजुल कर खुशी खुशी रहते थे, लेकिन अचानक एक बार ना जाने कहां से उस जंगल में एक बूढ़ा शेर आ गया, और उसने पूरे जंगल में तबाही मचा दी, वह कहीं भी कभी भी किसी भी जानवर का शिकार कर देता, और उसे खा जाता, यह सब देख कर सारे जानवर बहुत परेशान हो गए, और उन्होंने मिलजुलकर एक फैसला लिया,

और कहां महाराज अगर इस तरह आप एक-एक कर हम सब को मारने लगे तो 1 दिन ऐसा आएगा, कि जंगल में एक भी जानवर नहीं बचेंगे, तो मैं क्या करूं, मुझे जब भूख लगेगी तो मैं तो शिकार करूंगा, महाराज हमारे पास आपके लिए एक सुझाव है, हम हर रोज आपके लिए एक जानवर भेज दिया करेंगे, जिससे आपकी भूख भी शांत हो जाएगी,

Sher Aur khargosh ki kahani
Sher Aur Khargosh ki Kahani

और हम भी शांति से इस जंगल में रह सकेंगे, शेर को यह बात पसंद आई, और उसने कहा ठीक है, लेकिन अगर किसी दिन तुमने कोई जानवर नहीं भेजा, तो मैं तुम सबको मार कर खा जाऊंगा, इसी तरह हर रोज कोई न कोई जानवर शेर के पास जाने लगा और शेर भी खुशी-खुशी उसे मार के खाने लगा, और सारे जानवर भी शांति से जंगल में रहने लगे,

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इसी तरह दिन बीते गए, एक बार एक खरगोश की बारी आई, खरगोश बहुत घबरा गया ,और धीरे-धीरे चलते चलते शेर की गुफा के पास पहुंचा, और चलते चलते रास्ते मैं उसने एक कुआं देखा, और उसके दिमाग में एक विचार आया, वो खुश हुआ फिर भी वह धीरे धीरे चलते चलते शेर के पास पहुंचा, वहां पर शेर उसका इंतजार कर रहा था,

और खरगोश को इतनी देर आने की वजह से बहुत गुस्सा हुआ, अरे तुमने इतनी देर कहां लगा दी, अब तो मुझे इतनी भूख लगी है, कि तुम्हें खा कर भी मेरी भूख शांत नहीं हो सकती, महाराज मुझे माफ कर दीजिए, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, रास्ते में आते समय मुझे एक बहुत बड़ा शेर मिला, मैं अकेला थोड़ी ना रहा था, मेरे साथ तीन खरगोश और थे,

Sher Aur Khargosh
Sher Aur Khargosh

लेकिन वह शेर उन तीनों को खा गया, और मैं बड़ी मुश्किल से जान बचाकर आपके पास आ सका हूं फिर शेर ने कहा ऐसा कौन सा जानवर आ गया, जो मुझसे ही बड़ा शक्तिशाली है, खरगोश मुझे जल्दी से और दूसरे शेर के पास ले चलो, खरगोश धीरे से अपने मन में मुस्कुराया और कहा चलिए महाराज मैं आपको ले चलता हूं, और शेर को कुएं के पास ले गया,

और कहा महाराज वह दूसरा शेर इस कुएं में रहता है, देखिए शेर गुस्से में था, वह सीधा उस कुएं के ऊपर गया, और शेर ने जैसे ही नीचे देखा तो पानी में उसे अपनी परछाई दिखाई दी, शेर देख कर जोर से दहाड़ा तो नीचे से उसकी जो परछाई थी उसमें से भी दहाड़ने की आवाज आई, आवाज सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आया,

और वह परछाई को असली शेर समझ कर उसको मारने के लिए कुएं में कूद गया, और हमेशा के लिए खत्म हो गया, सारे जानवर खुशी मनाने लगे और खरगोश का धन्यवाद करने लगे, इस तरह बच्चों खरगोश ने अपनी जान तो बचा ही ली और उस शेर की खौफ से सारे जानवरों को हमेशा के लिए बचा लिय|

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