Icchapurti Kua ki Kahani

Moral Stories for Kids in Hindi – Moral Stories in Hindi

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Short Moral Stories in Hindi for kids and Adult – दोस्तों Hindi moral stories or Moral stories in hindi for kids को सुनने की बात ही अलग होती है | क्योंकि Short Hindi moral stories से हम अपनी जिंदगी में कुछ सुधार ला सकते हैं | इसलिए मैं आज आपको बहुत ही खास short stories in hindi for kids सुनाने वाला हूं | आशा करता हूं कि आपको यह Hindi moral stories for kids अच्छी लगे |

शेर और चूहा. (Moral Stories for Kids in Hindi)

एक जंगल में शेर और चूहा रहते थे| 1 दिन दोपहर में नटखट चूहा खेलते हुए सोते हुए शेर के ऊपर जागीरा|और चूहे के गिरते ही शेर नींद से जाग गया| और बोला तूने मेरी नींद खराब की है| अब मैं तुझे खा लूंगा| ना ना मुझे मत खाना,” मुझे खाने से आपकी भूख नहीं मिटेगी|

 sher aur chuhe ki kahani
sher aur chuhe ki kahani

फिर चूहे ने बोला अगर आप मुझे छोड़ दोगे तो,”मैं आपके किसी दिन काम आ जाऊंगा |तू इतना छोटा है, भला तू क्या मेरी मदद करेगा| जा तुझे छोड़ दिया, एक दिन शेर जंगल में टहलते हुए,”एक शिकारी के जाल में फंस जाता है|

Moral Stories for Kids in Hindi or Moral Stories in Hindi

और बचाओ बचाओ कहकर चिल्लाने लगा| चूहा शेर की आवाज सुनकर आता है| और जाल को काट कर शेर को छुड़ा लेता है|

इस (Hindi moral Stories) कहानी से हमें यह सीख  मिलता है| कि बच्चों  हमें कभी किसी को कम नहीं समझना चाहिए|

धोबी का गधा. (Moral Stories in Hindi For kids)

एक गांव में एक धोबी रहता था| धोबी रोज लोगों के घर जाता और, लोगों के गंदे कपड़े धोने के लिए लेकर आता था| धोबी के पास एक गधा था| जिस पर वह कपड़ा ले जाता था|और ले जाता था| गधा काफी बुड्ढा हो चुका था, और कमजोर भी हो चुका था, एक दिन ऐसे ही कड़ी धूप में,” धोबी कपड़े  ले जा रहा था|गर्मी की वजह से गधे और धोबी दोनों का बुरा हाल था|

अचानक गधे का पैर लड़खड़ा आया और गधा गड्ढे में जा गिरा | और गधा कमजोर होने के कारण गड्ढे से बाहर नहीं निकल पा रहा था| फिर धोबी ने गधे को निकालने का पूरा प्रयास किया| लेकिन गड्ढा होने के कारण गधा नहीं निकाल पाया| फिर डर के मारे गधा जोर जोर से चिल्लाने लगा| और धोबी भी प्रयास करते करते थक गया| फिर उसने सोचा कि, यह गधा बुड्ढा हो चुका है| और किसी काम का भी नहीं है|

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तो इसको निकालने से कोई फायदा तो नहीं है| क्यों ना इस गड्ढे को मिट्टी से भर कर गधे को यहीं दफना दिया जाए|यह सोचकर धोबी ने गांव के लोगों को आवाज लगाई | तो सारे लोग अपना-अपना फावड़ा लेकर आ गए| और सब मिलकर जल्दी-जल्दी गड्ढे में मिट्टी डालने लगे, यह सब देखकर गधे की आंख में आंसू आ गए| कुछ देर तक गधा चिल्लाता रहा|

Dhobi aur gadhe Ki Kahani
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और बाद में चिल्लाना भी बंद कर दिया|सब लोग और तेजी से गड्ढे में मिट्टी डालने लगे,” थोड़ी देर बाद जब धोबी ने गड्ढे में झांक देखा तो वह हैरान हो गया| गधा विचित्र सी हरकत कर रहा था| जैसे ही मिट्टी गधा के पीठ पर आती,”तो वह पीठ हिला कर मिट्टी गड्ढे में गिरा देता| और कूदकर एक कदम ऊपर आ जाता| ऐसे ही करते करते गड्ढा भर गया|

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और गधा गड्ढे से बाहर आ गया, फिर सारे लोग गधे को हैरानी से देखने लगे|दोस्तों यह कहानी हमें बहुत बड़ी सीख देती है जिंदगी भी कई बार हमारे ऊपर मिट्टी डालती है| कई बार बड़ी-बड़ी परेशानियां हम लोगों के सामने आती है| लेकिन जिंदगी के कुएं से निकलने का यही सही तरीका है|

बच्चों इस Moral Stories से हमें यह सीख मिलती है| कि परेशानी में कभी घबराना नहीं चाहिए| उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए|

दिन में सपने. (Best Hindi Stories for Kids)

एक समय की बात है,”एक गांव में एक दूधवाली रहती थी| मां मैं यह दूध बेचने शहर जा रही हूं ,क्या आपको कुछ मंगवाना है| नहीं बेटी लेकिन अगर तुम अपने लिए कुछ लेना चाहती,” हो तो दूध बेचकर जो पैसे मिले उससे खरीद लेना| लेकिन मैं दूध बेचकर तो ज्यादा पैसे नहीं कमा सकती|लेकिन हां उन पैसों से मैं,भूरे किसान से मुर्गियां कर दूंगी| और वह मुर्गी रोज-रोज अंडे देगी |

Din Mein Sapne dekhna
Din Mein Sapne Dekhna

फिर मैं उन अंडों को बाजार में भेज दूंगी ,”अंडों से मुझे काफी पैसे मिलेंगे, तो मैं उनसे अपने लिए कपड़े कर दूंगी| यह सब सोच ही रही थी| कि अचानक उसका पैर एक गड्ढे में फंस गया और उसके सर से दूर का मटका गिर गया,और दूध नीचे बिखर गया|फिर वह रोते रोते घर गई ,”और अपनी मां से बोली मुझे दुख है, कि मैंने सारा दूध गिरा दिया|

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कोई बात नहीं तुम दूध की चिंता मत करो,”लेकिन एक बात का हमेशा ध्यान रखना जब तक अंडे ना फूट जाए तब तक चूजे गिनने से कोई फायदा नहीं| तो यह बताओ यह कहानी तुम्हें पसंद आई,” हां पसंद आई लेकिन उस चूजे गिनने वाली बात का क्या मतलब था| इसका मतलब यह है,”कि जब तक हाथ में कुछ होने उसका अंदाजा नहीं लगाना चाहिए|

जादुई कुआं. (Moral Stories in Hindi for Children)

100 साल पहले एक इच्छापूर्ति कुआं था| जो भी इसमें सिक्का डालकर अपनी इच्छा मांगता, वह उनकी इच्छा पूरा कर देता| इसी तरह लोग कुएं में सिक्का डालकर अपनी इच्छा मांगा करते और कुमाउं सबकी इच्छा पूरी करता| लेकिन इच्छापूर्ति कुआं बुड्ढा हो चुका था| और उस उसकी शक्तियां कम हो चुकी थी,”और वह बहुत दुखी रहने लगा काश कुछ ऐसा हो जाए|कि जिससे मेरी शक्तियां वापस मिल जाए| और मैं लोगों की इच्छा फिर से पूरी कर सकूं,”हे भगवान मुझे मेरी शक्तियां वापस दे दो|

आपकी बहुत कृपा होगी|लेन कुछ ना हुआ इच्छापूर्ति कुआं और दुखी हो गया| एक दिन एक छोटी बच्ची इच्छापूर्ति कुआं के पास आए| रितु हे इच्च्पूर्ति कुआं मैंने सुना है आप सबकी इच्छा पूरी करते हैं मेरा कोई दोस्त नहीं है|मैं चाहती हूं कि आप मुझे एक छोटा सा पप्पी दे दो जिसके साथ मै दिनभर खेल सकू| ऐसा बोल रितु ने सिक्का कुएं में डाला और वहां से चली गई| यह सुनकर इच्छापूर्ति कुआं और उदास हो गया| काश मैं इस छोटी सी बच्ची का मदद कर  पाता |भगवान कृपा करके मेरी शक्तियां वापस कर दीजिए,”

Icchapurti Kua ki Kahani - Moral Stories for Kids in Hindi
Icchapurti Kua ki Kahani

मुझे इस छोटी सी बच्ची की इच्छा पूरी करनी है|ऐसा बोल कर अच्छा पूर्ति कुआं रोने लगा ,जंगल में रहने वाली एक परी ने रोने की आवाज सुनकर कुएं के पास आई,” हे इच्छापूर्ति कुआं तुम क्यों रो रहे हो, परी मेरी यही समस्या है| कौन सी समस्या मैं बहुत बुड्ढा चुका हूं| और मेरी सारी शक्तियां खत्म हो चुकी है|लेकिन मुझे उस छोटी सी बच्ची की इच्छा पूरी करनी है| ठीक है मैं तुम्हारी सहायता करूंगी|मैं तुम्हारे लिए इच्छापूर्ति पर्वत पर जाकर इच्छापूर्ति कछुआ से  तुम्हारे बारे में बात करूंगी| अब तुम बिल्कुल मत रोना|

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परी उड़कर इच्छापूर्ति पर्वत पर पहुंच गई| वहां पहुंचकर परी कछुए से मिली और उसने कछुए से यह सारी बात बताई|कछुआ बोला तुम सही जगह आई हो| यह तालाब दिख रहा है, यह तुम्हारी दोस्त की समस्या का समाधान है, तुम्हें इस तालाब का जल इच्छापूर्ति कुआं के पानी में मिलाना है जिससे उसकी सारी शक्तियां वापस आ जाएंगी| शुक्रिया इच्छापूर्ति कछुआ|परी ने तालाब से कुछ जल इकट्ठा कर के,” इच्छापूर्ति कुआं के पास जाकर उसके पानी में मिला दिया| जिससे उसकी सारी शक्तियां वापस आ गई| शुक्रिया परी मेरी सारी शक्तियां लौट आए|

तुम बहुत अच्छी हो ठीक है| लेकिन तुम पहले उस छोटी बच्ची का इच्छा पूरी करो|रितु को एक नन्हा पप्पी मिल गया धन्यवाद इच्छापूर्ति कुआं तुम बहुत अच्छे हो| उसके बाद इच्छापूर्ति कुआं बहुत खुश हुआ ,”क्योंकि अब वह सभी लोगों की इच्छा पूरी कर सकता था|

जादुई नदी. (Hindi Moral Stories for kids)

बहुत समय पहले  एक  गांव में छोटा सा व्यापारी था| वह व्यापारी हर घर में जाकर बहुत सारी चीजें बेचता था| चप्पल जूते बर्तन कपड़े ऐसे बहुत सारी छोटी छोटी चीजें बेचता था| उसी कमाई से उससे उसका गुजारा चलता था| वह बहुत खुश था गांव से लेकर शहर तक उन चीजों को उठाकर लाने के लिए उसने एक गधे को पाला था|रोजाना बोझ उठाते उठाते हुए| गधा काफी ज्यादा थक गया था, एक दिन व्यापारी को पता चला कि नमक में बहुत ज्यादा मुनाफा है, इसलिए उसने बहुत सारा नमक खरीद लिया|

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और नमक को गधे के पीठ पर रख दिया| रास्ते में चलते चलते गधा बहुत थक गया था| और उसके पैर में दर्द होने लगा|उसे अब प्यास भी लगने लगी थी| रास्ते में उसने देखा कि एक नदी है| पानी को देखकर गधा खुश हुआ और पानी की ओर बढ़ने लगा और पानी पीने लगा,” फिर पानी पीने उसे तकलीफ हो रही थी| क्योंकि उसके पीठ पर नमक रखा था| मगर उसको अपनी प्यास बुझाने थी| वह बेझिझक आगे बढ़ गया,और जैसे ही उसने अपने आगे के दोनों पैरों को पानी पीने के लिए मोड़ा ,तो वह फिसल कर पानी में गिर गया|

Moral Stories for Kids in Hindi - Jadui nadi
Jaadui Nadi Ki Kahani

लेकिन गधा डूबा नहीं वह अभी भी पानी के ऊपर ही था| क्योंकि नमक पानी में भीगने के बाद हल्का हो गया था, फिर गधा आसानी से पानी से बाहर आ गया| फिर सोच में पड़ गया की या नमक की थैली इतनी हल्की कैसे हो गई|गधा कुछ देर तक सोचता रहा, उसको यह नहीं पता था, कि नमक की थैली पानी में पिलाई जाती है|उसने सोचा कि पानी में कोई जादुई सकती है| फिर उस पानी को धन्यवाद किया उसकी जान बचाने के लिए,” कि अगर वह नमक की थैली हल्की नहीं होती तो आज मैं जिंदा नहीं होता|

फिर उसने सोचा कि उस पानी के वजह से आज मैं जिंदा हूं| यह सोच गलत था|फिर एक दिन व्यापारी ने बाजार से कपड़ा उठाया और गधे की पीठ पर रख दिया| फिर व्यापारी अपने गांव की ओर लौटने लगे,” क्योंकि नमक की व्यापार में उसे बहुत नुकसान हुआ था|इसलिए उसने सोचा कि वह कपड़े बेचेगा और अच्छा मुनाफा काम आएगा| लेकिन इस बार भी वह कपड़े का पोटला गधे के लिए बहुत भारी था|फिर गधे ने सोचा क्यों ना इस पोटली को जादुई नदी में भिगोकर हल्का करलूं |

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लेकिन इस बार कपड़े का पोटली हल्का होने की बजाय और भी भारी हो गया और गधा डूबने लगा गधे को डूबता देख व्यापारी ने नदी में छलांग लगाई और गधे की जान बचा ली, पूरे दिन गधा दुखी होकर बैठ गया ,और उसने ठान लिया कि वह कभी भी जादुई नदी का विश्वास नहीं करेगा|

तो बच्चों इस से (Moral Stories for Kids in Hindi) हमें यह शिक्षा मिलती है| कि जब हम काम चोरी करने का सोचते हैं| तो हमें बहुत सारी परेशानी का सामना करना पड़ता है|

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