Hindi Motivational short moral story

Moral Stories in Hindi – New Short Moral Stories in Hindi

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Top New Short Moral Stories in Hindi for kids and Adult – दोस्तों Hindi moral stories or Moral stories in hindi को सुनने की बात ही अलग होती है | क्योंकि Short Hindi moral stories से हम अपनी जिंदगी में कुछ सुधार ला सकते हैं | इसलिए मैं आज आपको बहुत ही खास short moral stories in hindi सुनाने वाला हूं | आशा करता हूं कि आपको यह Hindi moral stories for kids and adult अच्छी लगे |

दो आलसी (Moral Stories in Hindi for kids Class 7, 8)

एक राज्य में रमेश और सुरेश नाम के दो भाई रहते थे, वे दोनों बचपन से ही कामचोर थे, उनकी कामचोरी का कारण उनका आलस था | जब भी उन्हें कोई काम करने के लिए कहा जाता तो वह आलस के मारे सो जाते रमेश और सुरेश की मां उन दोनों से तंग आ चुकी थी, उन्हें समझ नहीं आ रहा थ| कि वह ऐसा क्या करें कि उनके दोनों बेटे आलस त्यागकर मेहनत करने लग |1 दिन रमेश और सुरेश आम के पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे, कुछ देर बाद उन दोनों के बीच पेड़ से आम गिरा ,क्योंकि उन दोनों में बहुत सुस्ती आ रही थी,

उन दोनों में से एक ने भी आम उठाने की कोशिश नहीं की, वे दोनों बस लेटे-लेटे ही आम को देखते रहे ,थोड़ी देर बाद वहां से उनके राज्य का मंत्री गुजरा तभी मंत्री को जाते देख रमेश ने मंत्री से बोला राम-राम मंत्री जी आपकी सहायता चाहिए, तभी मंत्री ने बोला कैसी सहायता तभी रमेश ने बोला मंत्री जी अगर हो सके तो क्या यह आम आप मेरे हाथ में थमा सकते हैं, रमेश की बात मंत्री जी को अटपटी लगी ,वे रमेश से पूछता है, अरे भाई यह कैसा काम हुआ आम तुम्हारे सामने ही तो पड़ा है, तुम खुद ही ले लो नहीं हो पाएगा मंत्री जी बहुत मेहनत करनी पड़ेगी,

Do Aalsi
Do Aalsi

यह किस तरह की मेहनत हुई भला तुम से दो कदम भी नहीं चला जाता, क्या हां मंत्री जी यही तो परेशानी है ,चलना फिर ना किसको पसंद है, आप कृपया यह आम हमें पकड़ा दीजिए ,रमेश और सुरेश की आलस भरी स्वभाव को देखकर मंत्री को बहुत गुस्सा आया, वह रमेश सुरेश को आम दिए बगैर वहां से चले गए| रमेश सुरेश आलस दिखाकर जस की तस पड़े रहे, मंत्री रमेश और सुरेश के घर गया और उनकी मां से मिला, तो उनकी मां ने कहा मैं बहुत परेशान हूं मंत्री जी मुझे समझ नहीं आता कि इन निट्ठलो लो को कैसे समझाऊं |

Top new short moral stories in hindi for kids class 7

मेहनत करने से ऐसे ही कतराते रहे तो पता नहीं इनके जीवन में आगे क्या होगा, तभी मंत्री जी ने बोला आप चिंता ना करें अगर मुझे उन दोनों के बारे में पहले जानकारी होती तो, अब तक कुछ ना कुछ निष्कर्ष जरूर निकाल लिया होता, आप कल अपने दोनों बेटों को राज महल भेज दीजिएगा, रमेश सुरेश की मां उन दोनों को राज महल जाने को कहती है ,वह दोनों अगले सुबह ही राज महल पहुंचते हैं| और राजा के सामने पेश होते हैं, तो राजा रमेश सुरेश से कहते हैं, कि तुम दोनों के लिए मेरे पास खास काम है, क्या महाराज कल से तुम राज महल के एक क्षेत्र की रखवाली करोगे |

क्योंकि तुम दोनों को ज्यादा मेहनत वाले काम पसंद नहीं है. तो यह काम तुम दोनों अच्छे से कर पाओगे |ठीक है, महाराज जैसी आपकी आज्ञा तभी मंत्री ने बोला जहां तुम रखवाली करोगे वहां बहुत सारे कीमती सामान रखे हैं| वहां कुछ ऊंच-नीच नहीं होनी चाहिए, ठीक है, मंत्री जी अगले दिन रमेश और सुरेश पहरेदार बनकर रखवाली करने बैठ जाते हैं, और अपने आलसी स्वभाव के कारण और बैठे-बैठे सो जाते और उनकी लापरवाही के चलते महल में चोरी हो जाती है ,अगली सुबह जब वह उठते हैं,

Do Aalsi ki Kahani
Do Aalsi ki Kahani

तो प्रधानमंत्री को अपने सामने खड़ा पाते हैं ,आलसी हो तुम दोनों को एक छोटा सा काम दिया था |वह भी तुम दोनों पर नहीं हो पाया तुम दोनों मेरे साथ चलो तुम्हारी गलती के लिए तुम्हें सजा दिया जाएगा |  तुम्हारी गलती की वजह से राजमहल का बहुत नुकसान हुआ है, तुम दोनों को मृत्यु दंड मिलेगा ,क्या मृत्यु दंड हां शेर के हवाले कर देंगे यह सुनते ही रमेश और सुरेश बुरी तरह डर जाते हैं,

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उन्हें जैसे ही शेर के सामने लाया जाता है, वह दोनों राजा के सामने गिर जाते हैं, और बोलते हैं क्षमा कर दीजिए महाराज हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई है, अगर हम आलस नहीं दिखाते और काम ईमानदारी के साथ करते तो चोरी नहीं होती हम वादा करते हैं, कि आगे से कभी भी आलस नहीं करेंगे उन दोनों की बात सुनकर राजा उन्हें क्षमा कर देते हैं |

तो बच्चों इस कहानी ( Moral stories in Hindi or Hindi Moral stories ) से हमें यह शिक्षा मिलती है हमें कभी आलस नहीं करनी चाहिए

भुक्कड़  चूहा (Hindi Moral Stories for Kids)

किसी गांव में चूहों का एक परिवार रहता था| उन चूहों में एक चूहा ऐसा भी था ,जिसे खाने का बहुत शौक था, और पूरा समय बस खाता और सोता रहता था,  फिर भी उसे संतुष्टि नहीं होती थी, उसके इस आदत से उसके परिवार वाले भी परेशान रहते थे, बेटा इतना मत खाया करो सेहत बिगड़ जाएगी |नहीं मम्मी ऐसा कुछ नहीं होगा अगली सुबह कुकू के दोस्त का जन्मदिन था, उसका दोस्त अपने जन्मदिन पर उसे न्योता देने आया कुकू कुकू कल मेरा जन्मदिन है, और मेरे घर में पार्टी है, तुम भी जरूर आना हां दोस्त मैं जरूर आऊंगा,

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इसके बाद चिंटू वाह से चला गया |अगले दिन कुकू पार्टी में गया, और अपने भूख पर काबू नहीं कर पाया और मेहमानों के आने से पहले पूरा केक खा गया, यह सब देख सभी को कुकू पर बहुत आया सब उसे पार्टी से जाने के लिए कहने लगे तुमने हमारे लिए कुछ भी नहीं छोड़ा, तुम यहां से चले जाओ, तुम तो भुक्कड़ हो निराश होकर को को वापस अपने घर को निकल पड़ा ,लेकिन यह सब होने के बाद भी कुकू के खाने मैं कोई परिवर्तन नहीं आया |अगले दिन कुकू का दोस्त उसे बुलाने को आया चलो खेतों में चलते हैं,

Bukhar chuhe ki kahani
Bukhar chuhe ki kahani

किसानों की फसल बहुत अच्छी हो रही है| आज खाने को बहुत कुछ मिलेगा अरे वाह चलो बहुत मजा आएगा चलो चलें |कुकू और पिंटू अपने बाकी सभी दोस्तों के साथ खेत में चले गए, खेत में जाकर फसलों पर टूट पड़े सभी ने जल्दी-जल्दी खाना खा ली लेकिन भुक्कड़ चूहे का पेट नहीं भरा यह देखकर उसका दोस्त पिंटू चूहा बोला अरे जल्दी खाना हमें जाना भी है, अरे रुक ना इतनी भी क्या जल्दी है, अभी पेट भर कर खाने दे और एक लंबी सी डकार लेने दे तभी हम चलेंगे|

ऐसा कहकर कुकू फिर से खाने लगा ,पर पिंटू चूहा दोबारा बोला अरे जल्दी करना अरे ठीक है, ना इतने में सभी चूहों में भगदड़ मच गई अरे भागो भागो बिल्ली आ गई, सारे चूहे तेजी से भागने लगे मगर भुक्कड़ चूहा धीरे धीरे चल रहा था|

क्योंकि बहुत ज्यादा खाने की वजह से वह भाग नहीं पा रहा था |और उसने अपने दोस्तों से  बोला मेरे लिए रुको इतने में कुकू का पैर फंस गया कुकू फटाफट अपना पैर निकालने लगा बिल्ली धीरे-धीरे उसके पास आ गई, और बोली आज तुझे मुझसे कौन बचाएगा ,आज तो मेरी दावत हो गई|

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इतने में कुकू का पैर निकल गया फिर लगड़ाते लगड़ाते कुकू जैसे तैसे भागने लगा बिल्ली भी उसके पीछे भागने लगी लेकिन थोड़े ही देर में कुकू का घर आ गया, बच गया आज ऐसा सोचकर धीरे चलने लगा इतनी देर में वह बिल्ली दौड़कर आ गई, वह जैसे ही घर में घुसने लगा|तो वह दरवाजे मैं ही अटक गया क्योंकि खा खाकर उसका पेट इतना मोटा हो गया था कि वह अपने घर में भी नहीं कुछ पा रहा था अंदर से सभी चूहे उसके घर के अंदर खींचने लगे और बाहर से बिल्ली उसके पूंछ पकड़कर खींचने लगी |

chuhe ki kahani
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यह देखकर कुकू चिल्लाने लाने लगा| और रोने लगा लेकिन बिल्ली ने उसकी पूछ नहीं छोड़ी ,और आखिर में उसकी पूछ ही टूट गई और बिल्ली धड़ाम से पीछे गिर गई सभी चूहों ने जैसे-तैसे कुकू को अंदर खींच लिया इस घटना के बाद कुक्कू को अपनी गलती का एहसास हुआ अब उसने खाने का लालच छोड़ दिया|

तो बच्चों इस कहानी (Moral stories in hindi for kids) से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी चीज की अति हमेशा नुकसानदायक होती है|

2. समझदार बकरी (Short Moral Stories in Hindi)

बहुत समय एक जंगल में एक बिल्लू नाम का भेड़िया रहता था | वह काफी दिनों से जंगल में पानी की तलाश कर रहा था ,पानी ना मिलने का कारण उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी ,ना जाने मुझे पानी कब मिलेगा, और कितना चलना पड़ेगा और अगर पानी ना मिला तो मैं पक्का मर जाऊंगा, हे भगवान कुछ मदद करो, थोड़ी देर में उसे कुछ दूर एक कुआं दिखाई देता है| कुंवा देख बिल्लू बहुत खुश हो जाता है, वह पूरे जोश के साथ कुएं के पास पहुंचता है, और उसमें छलांग लगा देता है,

बिल्लू को पानी के साथ साथ वहां एक बकरी भी दिखाई देती है,बिल्लू और भी ज्यादा खुश हो जाता है, अरे वाह मुझे तो पानी के साथ साथ खाना भी मिल गया बकरी बिल्लू को देखकर डर जाती है, फिर सोचने लगती है कहीं भेड़िया उसे खाना जाए बिल्लू पानी पीने लगता है, कितना मीठा पानी है ,मजा आ गया बिल्लू पानी पीने के बाद खुश हो जाता है, जब वह पानी पीने के बाद कुएं को ध्यान से देखता है ,तो वह चिंता में पड़ जाता है, वह बहुत ज्यादा गहरा था| हे भगवान यह मैंने क्या किया |

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Samajhdar Bakri ki kahani

मैंने तो सोचा ही नहीं कि कुएं से बाहर कैसे निकल लूंगा |बिल्लू कुएं से निकलने के लिए छलांग लगाता है, मगर कुछ फायदा नहीं होता वह थक हार कर बैठ जाता है,फिर वही डरी और घबराई बकरी को देखता है, अरे मैं तो भूल ही गया पहले इस बकरी को खा लेता हूं कुएं से निकलने की तरकीब मैं बाद में भी सोच लूंगा| बकरी अपना जान बचाने के लिए भेड़िए से कहती है, भेड़िए भैया क्या तुम मुझे खाने वाले हो और नहीं तो क्या कोई बेवकूफ ही तुम्हारे जैसे स्वादिष्ट भोजन को छोड़ेगा ,,बकरी कहती है वह तो ठीक है |

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पर मेरे पास कुएं से निकलने के लिए एक तरकीब है, भेड़िए भैया इसलिए मैं तुम्हारा मदद करना चाहती हूं ,नहीं तो रात में तुम भी यहां ठंड से मर जाओगे ,जैसे मैं पूरी रात में ठंड थी कैसी तरकीब  बताओ ,बकरी ने बताया भेड़िए भैया मुझे बहुत प्यास लगी थी इसलिए जल्दबाजी में मैं कुएं में कूद गई थी, बाद में मुझे समझ आया कि यह कुआं बहुत ही गहरा है, बहुत समय यहां रहने के बाद मैं समझ पाई हूं, कि मुझे यहां से निकलने के लिए किसी की आवश्यकता है, तभी मैं यहां से बाहर निकल सकती हूं,

अगर तुमने मुझे खा लिया तो तुम भी अकेले पड़ जाओगे तुम्हें भी किसी की सहायता पड़ेगी यहां से बाहर निकलने के लिए ,मैं चाहती हूं, कि तुम मेरे पीठ पर चढ़कर छलांग लगा दो और बाहर निकल जाओ और बाद में कुएं में रस्सी डालकर मुझे बाहर निकाल लेना|बिल्लू ने सोचा यह बकरी बात तो सही कह रही है, अगर इसे खा लिया तो मैं बाहर कैसे निकल लूंगा वैसे तो इसे मैं बाहर निकलकर भी खा सकता हूं, बिल्लू बोला तुम सही कह रही हो हम एक दूसरे की मदद से ही बाहर निकल सकते है| बकरीद पैर को दीवार से टिका लेती है,

Moral Stories in Hindi
Bakri ki kahani

और बिल्लू बकरी के ऊपर चढ़कर पूरी ताकत से छलांग लगा देता है, और ऐसे बाहर आ जाता है बिल्लू रस्सी का इंतजाम करता है ,और कुएं में  रस्सी डालकर फिर बकरी को भी बाहर निकाल लेता है जैसे ही बिल्लू बकरी को खाने के लिए आगे बढ़ता है |चालाक बकरी कहती है तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया भैया भैया तुमने मुझे खाने की जगह मेरी बात मान ली और हम दोनों की जान बचा ली आप बहुत अच्छे हो और दयावान भी हो आप मुझे खा सकते थे, परंतु आपने ऐसा नहीं किया|

बिल्लू को बकरी का बात सुनकर बहुत अच्छा लगा जाने अनजाने में उसने किसी की मदद जो की थी| बिल्लू बोला शुक्रिया तो मुझे तुम्हारा करना चाहिए, इससे पहले मेरी नियत बदले तुम यहां से चली जाओ, तुम्हें तो मैं अभी भी खा सकता हूं ,फिर बकरी वहां से चली गई

इस कहानी (Hindi Moral Stories or Short Moral Stories in Hindi) से हमें यह शिक्षा मिलता है कि कि हमें मुसीबत के समय घबराना नहीं चाहिए समझदारी के साथ शत्रु का सामना करना चाहिए और शत्रु को मित्र बना लेना चाहिए|

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